January 14, 2026

टोमैटो फ्लू: जाने कितना ख़तरनाक है यह वायरस?

  • इस फ़्लू में शरीर के अलग-अलग भागों पर टमाटर की तरह सुर्ख लाल रंग के फोड़े उभरने लगते हैं।
  • इस फ्लू में मरीज को बुखार आता है और साथ ही पानी की कमी भी होने लगती है। बॉडी पर लाल निशान होने लगते हैं और तेज खुजली रहती है।
  • इस वायरस का संक्रमण तेज़ी से फैलता है इसलिए घर के दूसरे सदस्यों से पर्याप्त दूरी बनाए रखने की ज़रूरत है।

देशभर में अभी कोरोना महामारी का असर खत्म भी नहीं हुआ है कि लोगों को एक नए बीमारी का डर सता रहा है। टोमैटो फ्लू नामक इस बीमारी ने लोगों की नींद उड़ा दी है।  17 अगस्त को लैंसेट जर्नल में प्रकाशित एक पोस्ट में भारत में एक नई बीमारी सामने आई हैं, टोमैटो फ्लू। जिससे अभी तक 80 से अधिक मरीज हो चुके हैं। तो क्या भारत से एक नई महामारी का जन्म हुआ है और क्या कोरोना महामारी और मंकीपॉक्स के बाद एक और इस नई बीमारी का सामना करना होगा। इसके लिए सबसे पहले ये जानना होगा कि ये टोमैटो फ्लू क्या है और कहां से आया है?

Image Source: GKbhai.com

इस फ्लू के नाम में आखिर ”टोमेटो” क्यों? टोमैटो फ्लू: जाने कितना ख़तरनाक है यह वायरस?

इस फ़्लू में शरीर के अलग-अलग भागों पर टमाटर की तरह सुर्ख लाल रंग के फोड़े उभरने लगते हैं। शुरुआत दिनों में इन फफोलों का आकार छोटा होता है लेकिन धीरे-धीरे ये बड़े होते हैं और बिल्कुल छोटे लाल टमाटर की तरह नज़र आते हैं। यही कारण है कि केरल के कुछ स्थानीय लोगों ने इस बीमारी को ”तक्काली पनी” का नाम दे दिया। ”तक्काली पनी” एक मलयाली शब्द है, जिसका अंग्रेज़ी में अर्थ होता है ”टोमेटो फ़्लू”। केरल में किसी भी नई बीमारी को नाम देने का एक पुराना चलन है। हालांकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इसे हाथ, पैर और मुंह की बीमारी बताता है।

टोमैटो फ्लू के लक्षण

इस फ्लू में मरीज को बुखार आता है और साथ ही पानी की कमी भी होने लगती है। बॉडी पर लाल निशान होने लगते हैं और तेज खुजली रहती है। शुरूआती लक्षणों की बात करें तो तेज बुखार के साथ जोड़ों में दर्द पेट में ऐंठन रहती है। इसके आलावा मरीज में जी मिचलाना और उल्टी, खांसी जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं।

कितना ख़तरनाक है यह वायरस? 

ज्यादातर यह बीमारी आराम करने और बुखार की दवा लेने से ही 5 से 7 दिन के भीतर ठीक हो जाती है। यह बीमारी एक बच्चे से दूसरे बच्चे में फैल सकती है लेकिन इसके बच्चों से बड़ों में फैलने की आशंका कम ही रहती है। हालांकि, कई विशेषज्ञों के मुताबिक यह कोई नई बीमारी नहीं है। बस इसे टेमैटो फ्लू का नया नाम दे दिया गया है। 

कैसे होती है जाँच और इलाज क्या है?

इस फ्लू के लक्षण भी डेंगू, चिकनगुनिया से मिलते जुलते ही हैं। जिस वजह से डॉक्टर मॉलिक्यूलर और सेरोलॉजिकल टेस्ट करने के लिए देते हैं। यदि जाँच के दौरान डेंगू, चिकनगुनिया, ज़ीका वायरस, ज़ोस्टर वायरस या हर्पीस में से कोई भी बीमारी नहीं निकलती है, तो डॉक्टर मरीज़ में टोमेटो फ़्लू की पुष्टि करते हैं। अभी तक इस फ्लू कोई खास एंटी वायरल उपचार नहीं है और डॉक्टर सहायक उपचारों का ही सहारा ले रहे हैं। जैसे कि बुखार के लिए एंटीबॉयटिक्स, रैशेज़ में खुजली या खरोंच के लिए एंटीसेप्टिक या एंटीबायोटिक क्रीम का इस्तेमाल। इसके साथ ही टोमैटो फ्लू की पहचान होते ही बच्चे को 10 दिनों के लिए क्वारंटाइन कर देने की सलाह दी जाती है। 

इस वायरस का संक्रमण तेज़ी से फैलता है इसलिए घर के दूसरे सदस्यों से पर्याप्त दूरी बनाए रखने की ज़रूरत है। साथ ही खाने-पीने के अलग बर्तन, साफ बिस्तर, कपड़े इत्यादि का ध्यान रखना जरूरी है। कई बार मुँह के अंदर फोड़े निकल जाने के वजह से खाने में परेशानी होती है। इस दौरान बच्चों को ज़्यादा तरल खाना देना चाहिए।

आखिर कैसे करें बचाव?

टोमैटो फ्लू नामक यह बीमारी कोरोना वायरस की तरह तेज़ी से नहीं फैलती और ना ही यह मंकीपॉक्स की तरह जानलेवा साबित होती है। टोमैटो फ्लू  होने वाले बच्चों को आराम करवाएं, स्कूल और खेलने ना जाने दें, बच्चों को फ्लूइड्स देते रहें। वहीं साउथ के कुछ राज्यों में इस बीमारी के फैलने के बाद राज्य सरकारों के स्तर पर सावधानी जरुर बरती जा रही है। 

नई बीमारी होने का दावा नहीं

लैंसेट जर्नल में जो रिसर्च पेपर प्रकाशित हुआ है उसमें यह कहीं नहीं लिखा है कि लैब टेस्ट या किसी और तरह से ये साबित हुआ हो कि टोमैटो फ्लू कोई नया वायरस है। डॉ अनिल बत्रा के अनुसार यह बच्चों में पाई जाने वाली हैंड, फुट एंड माउथ डिज़ीज़ ही है, या ये फ्लू उसका वेरिएंट भी हो सकता है। यह फ्लू पहले भी देश के हर हिस्से में बच्चों में पाई गई है। नई बीमारी का नाम देने के लिए पहले शोध और टेस्ट के ज़रिए इस बीमारी की पहचान होनी चाहिए।

कौन-कौन से राज्य हैं प्रभावित?

टोमैटो फ्लू का पहला केस केरल में आया था। 3 महीने में इस बीमारी ने 82 बच्चों को अपनी चपेट में लिया है। हाल ही में केरल के अंचल, अर्यांकवु और नेदुवाथूर में केस आने के बाद कर्नाटक और तमिलनाडु सरकार को अलर्ट कर दिया गया है। लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार भुवनेश्वर में 26 बच्चों में इस संक्रमण की जानकारी मिली है। इसके साथ ही कई दक्षिण राज्यों में इसके फैलने की खबर है।

Link Source: EconomicTimes, Wikepedia

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